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जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में 8 दिन बाद तिहाड़ जेल से रिहा हुए CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका , कोर्ट में लिखित अंडरटेकिंग और 50-50 हजार का पर्सनल बॉन्ड :

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में 8 दिन बाद तिहाड़ जेल से रिहा हुए CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका , कोर्ट में लिखित अंडरटेकिंग और 50-50 हजार का पर्सनल बॉन्ड :

नई दिल्ली. जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने के मामले में पिछले आठ दिनों से हिरासत में चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को आखिरकार राहत मिल गई है. दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने बुधवार, 21 अक्टूबर को दोनों की रिहाई का आदेश जारी कर दिया, जिसके बाद देर शाम दोनों तिहाड़ जेल से बाहर आ गए.

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन SEM कोर्ट का प्रभार संभाल रहे एसीपी (ACP) ऋतु राज ने पुलिस की यह दलील खारिज कर दी. दोनों नेताओं द्वारा जमानतदार पेश किए जाने और शांति बनाए रखने का लिखित आश्वासन (अंडरटेकिंग) दिए जाने के बाद कोर्ट ने कहा कि अब उन्हें आगे जेल में रखने की कोई जरूरत नहीं है. रिहाई का आदेश मिलने के बाद सौरव दास ने कहा, "सत्य की जीत हुई है."

रिहाई के लिए कोर्ट ने रखीं ये 5 प्रमुख शर्तें

SEM कोर्ट से मिली यह राहत मामले से बरी होना नहीं, बल्कि शर्तों के साथ हिरासत से रिहाई है. कोर्ट ने दोनों नेताओं को इन शर्तों के तहत रिहा किया है:

  1. 50-50 हजार रुपये का निजी मुचलका: सौरव दास और आशुतोष रांका ने 50-50 हजार रुपये का निजी मुचलका (Personal Bond) भरा और अपने जमानतदार कोर्ट के सामने पेश किए. निजी मुचलका कोर्ट को दिया गया कानूनी भरोसा होता है और इसमें नकद रकम जमा नहीं करानी पड़ती, लेकिन शर्त टूटने पर यह रकम जब्त की जा सकती है.
  2. शांति भंग न करने की लिखित अंडरटेकिंग: दोनों नेताओं ने कोर्ट में लिखित आश्वासन दिया कि वे रिहाई के बाद शांति और कानून-व्यवस्था भंग नहीं करेंगे.
  3. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन न बुलाने का भरोसा: दोनों ने अंडरटेकिंग दी है कि जब तक जंतर-मंतर को कानूनी तौर पर दोबारा अधिकृत प्रदर्शन स्थल (Designated Protest Site) घोषित नहीं किया जाता, तब तक वे वहां प्रदर्शन के लिए लोगों को नहीं बुलाएंगे.
  4. संविधान के दायरे में ही विरोध: भविष्य में कोई भी विरोध-प्रदर्शन संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही किया जाएगा.
  5. हर सुनवाई पर हाजिरी: दोनों नेताओं को मामले की हर तारीख पर कोर्ट में पेश होना होगा.

हाईकोर्ट में 'Gen Z' पर टिप्पणी और याचिका वापसी

बुधवार दोपहर SEM कोर्ट में पेशी से ठीक पहले इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में भी अहम सुनवाई हुई. सौरव दास और आशुतोष रांका ने 19 अक्टूबर को अपनी न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

सुनवाई के दौरान जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने दोनों के वकील अभिक चिमनी से याचिकाकर्ताओं की उम्र पूछी. वकील ने बताया कि सौरव दास 27 साल और आशुतोष रांका 32 साल के हैं. इस पर जस्टिस प्रसाद ने टिप्पणी की, "कोर्ट को बताया गया है कि 1997 के बाद जन्मे लोग 'Gen Z' कहलाते हैं, तो फिर आप दोनों 'Gen Z' नहीं हैं."

हाईकोर्ट ने बिना पुलिस अनुमति के बैरिकेड तोड़ने पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि बैरिकेड किसी मकसद से लगाए जाते हैं और बिना इजाजत भीड़ जुटाने पर बाहरी या असामाजिक तत्व आपके समूह में घुसकर माहौल बिगाड़ सकते हैं. हालांकि, हाईकोर्ट ने सुझाव दिया कि चूंकि दोपहर में SEM कोर्ट में सुनवाई होनी है, इसलिए वे पहले वहां का रुख देखें और जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत रिवीजन याचिका दाखिल करें. इसके बाद दोनों नेताओं ने हाईकोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली.

क्या है पूरा मामला और क्यों गए थे तिहाड़ जेल?

यह पूरा विवाद मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) में कथित गड़बड़ियों और वोटरों के नाम काटे जाने के आरोपों से जुड़ा है. अभिजीत दिपके की कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रही थी.

10 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दोनों नेताओं को एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया था और BNSS की धारा 126 व 170 के तहत 50-50 हजार रुपये का शांति बॉन्ड (Peace Bond) भरवाकर रिहा किया था. इसके अगले ही दिन, 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा (डी-नोटिफाई कर) दिया.

इसके बावजूद 13 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे और कथित तौर पर बंद गेट व बैरिकेड पार कर अंदर दाखिल हुए. पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और 14 अक्टूबर को SEM कोर्ट ने शांति बॉन्ड के उल्लंघन के आरोप में दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया. 19 अक्टूबर को जमानतदारों के दस्तावेजों में खामियों और शांति भंग की आशंका बताते हुए कोर्ट ने उनकी हिरासत 21 अक्टूबर तक दो दिन और बढ़ा दी थी.

23 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

हिरासत से रिहाई मिलने के बाद भी कानूनी प्रक्रिया अभी जारी रहेगी. SEM कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजे तय की है. कोर्ट ने सौरव दास और आशुतोष रांका को उस दिन अपने जमानतदारों के साथ उपस्थित रहने का निर्देश दिया है, जबकि दिल्ली पुलिस को जमानतदारों की वेरिफिकेशन रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी. वहीं, इस मामले की सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर धमकी दिए जाने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एक अलग एफआईआर भी दर्ज की है, जिसकी जांच चल रही है.